मंगलवार, 13 फ़रवरी 2018

हुआ बबाल आज फिर, किसी बयान पर यहाँ

[बहर-ए-हजज़ मुसम्मन मक़बूज़]

1212 1212 1212 1212

नहीं  लगाम  लग  सकी  कभी जुबान पर यहाँ।
हुआ बबाल आज फिर, किसी बयान पर यहाँ।।

मरीज़े इश्क़ की दवा हक़ीम कर सका नहीं

[बहर-ए-हजज़ मुसम्मन मक़बूज़]

1212 1212 1212 1212

बिसात-ए-गैर क्या है जब, नदीम कर सका नहीं।
मरीज़-ए-इश्क़  की  दवा  हकीम कर सका नहीं।।

रविवार, 19 नवंबर 2017

रूठने मनाने का सिलसिला पुराना है

दूरियाँ  दिलों  की  सब,  आज अब मिटाना  है।
रूठने   मनाने   का,   सिलसिला    पुराना  है।।