गुरुवार, 9 अगस्त 2012

दिल मेँ जलते थे जो प्यार के दिप थे



दिल में जलते थे जो प्यार के दीप थे,
नफरतों से गए बुझ वो सारे दिए।
नैन ज्योति में हम थे बसाए जिन्हे,
क्या करुँ दे दगा हमको वो चल दिए॥

खुशियों के बदले हमको, गम बेसुमार दे गया



ख्वाबों में कोई आके, दिल का करार ले गया।
वीराँ चमन को करके, जालिम बहार ले गया॥

तेरी यादों की लहरें सताती, तू भुलाने के काबिल कहाँ है।।

गम की दरिया में डूबा हुआ दिल, क्या पता इसका साहिल कहाँ है।
तेरी यादों की लहरें सताती, तू भुलाने के काबिल कहाँ है।।



तू बहुत खूबसूरत है ज़ालिम, बड़ी दिलकश जवानी है तेरी,
तेरे चेहरे पे मासूमियत है, दर्द-ए-दिल की कहानी है तेरी,
मुझको अफ़शोश इसका नहीं है, प्यार भी तेरा आदिल कहाँ है।।
तेरी यादों की लहरें सताती, तू भुलाने के काबिल कहाँ है।।


मैंने अरमान दिल में सजाए, तेरी चाहत की उम्मीद कर के,
बह गए अश्क बनकर के वो भी, मिट गए ख्वाब भी टूट कर के,
मैं हूँ वाक़िफ़ तेरे रंज़ो-ओ-ग़म से, और कुछ मुझको हासिल कहाँ है।।
तेरी यादों की लहरें सताती, तू भुलाने के काबिल कहाँ है।।


आईना दिल का तुझसे जुदा हो, मिल गया धूल मे फिर बिखर कर,
मैं हूँ जिन्दा अभी तक जो मुझको, मौत आती नहीं मौत बनकर,
मुझको कोई खबर भी नहीं है, दिल-ए-नादाँ का कातिल कहाँ है।।
तेरी यादों की लहरें सताती, तू भुलाने के काबिल कहाँ है।।