गुरुवार, 9 अगस्त 2012

दिल मेँ जलते थे जो प्यार के दिप थे



दिल में जलते थे जो प्यार के दीप थे,
नफरतों से गए बुझ वो सारे दिए।
नैन ज्योति में हम थे बसाए जिन्हे,
क्या करुँ दे दगा हमको वो चल दिए॥


दिल गया टूट आवाज भी न हुई,
अश्क आँखों में भर के जो रोते रहे।
मुझको ऐतबार था जिस किसी शख्स पे,
धोखा देकर के वो भी हमें चल दिए॥


दिल के टुकडे हुए हम नहीं गिन सके,
हर टुकडे में तश्वीर उसकी दिखी।
सब तो मिटता है दुनियाँ में जो भी बना,
नहीं मिटती खुदा की खुदाई लिखी॥


करवटें हम बदलते रहे रात भर,
ख्वाबों में भी नहीं उनका आना हुआ।
थाम के अश्क-ए-गम सीखो जीना "प्रदीप",
क्या है गम बेवफा जब जमाना हुआ॥