शनिवार, 15 अगस्त 2015

तू बेवफा थी वफा की राहोँ पे कहाँ से आती

मेरी खता ये थी कि मैने तुमसे प्यार किया॥
वफा की राहोँ पे तेरा इन्तजार किया॥

तू बेवफा थी वफा की राहोँ पे कहाँ से आती
खुद मैनेँ ही अपना वक्त बेकार किया॥

खुशियोँ की चाह क्या करेँगे कभी तुमसे
जब इस कदर दिल बेकरार किया॥

दिल की गहराइयोँ मेँ झाँक कर देख ले जालिम
ये दिल तेरी चाहत पे निसार किया॥

कल तो तुझसे मिलने को ये आँखे राजी नहीँ थी
अब तो दिल ने भी इनकार किया॥

रचनाकार : प्रदीप कुमार पाण्डेय