शुक्रवार, 21 अगस्त 2015

दिल मेँ अरमान मेरे सुलगते रहे।

उम्र भर तेरे गम से तडपते रहे।
दिल मेँ अरमान मेरे सुलगते रहे।
होके तुमसे जुदा चैन पाया नहीँ
नैन सावन से मेरे बरसते रहे।।

ये चाहत हमारी सजा बन गई
दोस्तोँ दर्दे दिल की वजह बन गई
इस कदर मुझको जीना गँवारा नहीं
मुस्कुराने को भी गर तरसते रहे।

तू है कश्ती मेरी मैं हूँ साहिल तेरा
जान है तू मेरी मैं भी हूँ दिल तेरा
ख्वाब हूँ मैं तेरा नींद तू है मेरी
रात भर नींद को हम तरसते रहे॥

मुद्दतों से मोहब्बत का आलम रहा
आशिकी बेवफाई का मातम रहा
इसका अन्जाम केवल जुदाई हुआ
इक मुलाकात को भी तरसते रहे॥

रचनाकार : प्रदीप कुमार पाण्डेय