बुधवार, 31 अगस्त 2016

हर इस सवाल का, जवाब नहीं होता



हर इक सवाल का, जवाब नहीं होता।
गम-ए-उल्फत का, हिसाब नहीं होता।।

मंगलवार, 30 अगस्त 2016

आतिश-ए-गम मेँ जल रहा दिल-ए-दीवाना है

आतिश-ए-गम में, जल रहा दिल-ए-दीवाना है॥
कितना खामोश, मोहब्बत का ये तराना है॥

हिन्दू चाहिए, न मुस्लमान चाहिए

हिन्दू चाहिए न मुसलमान चाहिए।
चाहिए हमें, तो बस इंसान चाहिए॥

सोमवार, 29 अगस्त 2016

ज़ख्म-ए-दिल को, अल्फ़ाजों में बयाँ करते हैं

ज़ख्म-ए-दिल को अल्फ़ाजों में बयाँ करते हैं ।
कोई बताए तो सही, हम कौन सा गुनाह करते हैं ।।

कोई चाँद पे, कोई सितारों पे लिखा करता है।

कोई चाँद पे, कोई सितारों पे लिखा करता है।
कोई एक पे, कोई हज़ारों पे लिखा करता है।।