शनिवार, 17 सितंबर 2016

नैन सावन से मेरे, बरसने लगे


दिल के अरमाँ मेरे, अश्क बन के बहे,
उनसे मिलने को भी, हम तरसने लगे। 
मुझको मेरी वफ़ा का मिला क्या सिला,
नैन सावन से मेरे, बरसने लगे।।

शुक्रवार, 16 सितंबर 2016

कैसे तुम बिन जिए ये दीवाना तेरा


ऐ मेरी जान-ए-मन, तुमको मेरी कसम,
बाद में दूर जा, पहले ये तो बता,
कैसे तुम बिन जिए, ये दीवाना तेरा।

मंगलवार, 13 सितंबर 2016

क्या हमसे हुई है खता




क्यों हमको सता तुम रहे हो बता, क्या हमसे हुई है खता।
साथ छोड़ा, क्यों तन्हा किया मुझको तूने, दिलवर तू इतना बता।।

आज ज़िन्दगी का, इक राज़ कह दिया उससे


आज ज़िन्दगी का, इक राज़ कह दिया उससे।
न चाहकर भी बहुत कुछ, आज कह दिया उससे।।

रविवार, 11 सितंबर 2016

इस शहजादी को अपना बना के रहेंगे


जोर जवानी का, दिखा के रहेंगे। 
कीमत कुर्बानी की, बता के रहेंगे।।

शनिवार, 10 सितंबर 2016

अपनी हर ग़ज़ल में सिर्फ़, हिन्दुस्थान लिख दूँगा



खून-ए-दिल से ज़मी पे, इक ऐलान लिख दूँगा।
जर्रे-जर्रे में, सदा-ए-जवान लिख दूँगा।।

सोमवार, 5 सितंबर 2016

मिला है तोहफा-ए-दिल, लगाने के लिए



मिला है तोहफा-ए-दिल, लगाने के लिए।
होती है खुशी दो पल की, मुस्कुराने के लिए॥

रविवार, 4 सितंबर 2016

वो मेरी बर्बादी की कहानी लिख रहे है


वो मेरी बर्बादी की कहानी लिख रहे है
अपनी जिन्दगी मैनें जिनके नाम कर दी।

शनिवार, 3 सितंबर 2016

होगा दीदार उनका कभी न कभी


होगा दीदार उनका कभी न कभी, ख़्वाब बस दिल मेँ यूँ ही सजाते रहो।
होगा एहसास उनको कभी न कभी, गीत चाहत के तुम गुनगुनाते रहो॥

उस रात सदा-ए-शहनाई आती रही


उस रात सदा-ए-शहनाई आती रही।
इक याद दिल के अरमानोँ को जलाती रही॥

न जीने की तमन्ना है, न मरने का इरादा है


सुबह से शाम तक उसके, मैं खोया हूँ खयालों में।
दीवानेपन में आया भूल, रास्ता मैं उजालों में।।

कितनों का है सिंदूर मिटा, कितनों की मिटी कलाई है

स्वतंत्रता दिवस २०१६ पर विशेष।

कितनों का है सिंदूर मिटा, कितनों की मिटी कलाई है।
कितनों की गोदें सूनी हैं, कितनों ने जान गवाई है।।

कितनों ने साहस दिखलाया, कितनों ने लड़ी लड़ाई है।
कितनों के अथक प्रयासों से, ये स्वतंत्रता मिल पाई है।।

शुक्रवार, 2 सितंबर 2016

मेरी बरकत को देख कर, ये जमाना जलता है


मेरी बरकत को देख कर, ये जमाना जलता है।
चाहतों के दरमियाँ दिल-ए-दीवाना जलता है॥

सारी कायनात से, अनजान बना बैठा हूँ



सारी कायनात से, अनजान बना बैठा हूँ।
क्या बताऊँ क्यों मैं, नादान बना बैठा हूँ॥

टूटे अरमानोँ का आया है, सैलाब देखिए



टूटे अरमानोँ का आया है, सैलाब देखिए।
इन बेक़सूर आँखों से, छलकता आब देखिए॥

मोहब्बत भी हमारे दिल पे, कैसे जोर खाती है



मोहब्बत भी हमारे दिल पे, कैसे जोर खाती है।
हिना भी सूखने के बाद, जैसे रंग लाती है॥

तसल्ली दिल को जिसको, देखने के बाद आती है



तसल्ली दिल को जिसको, देखने के बाद आती है।
वो जालिम जब भी आती है, करने नाशाद आती है॥

आके देख ये दिल, तेरे बिन कितना परेशान है



दिल-ए-आशिक तेरे बिन, कितना परेशान है।
कुछ कह नहीं सकती, ये आँखें बेजुबान हैं॥

बताएँ तो भी, बताने से डर लगता है



बताएँ तो भी, बताने से डर लगता है।
अपनों से बिछड, जाने से डर लगता है॥

मेरी आवाज़ पे कुछ यूँ, वो अपना सर उठाते हैं



मेरी आवाज़ पे कुछ यूँ, वो अपना सर उठाते हैं।
लोग सो कर ज्यों अपना, सुबह बिस्तर उठाते हैं॥

दरमियान-ए-हिज्र उसके दिल ने क्या कहा होगा



दरमियान-ए-हिज्र, दिल ने क्या कहा होगा।
फिर बिना तेरे वो, आखिर कैसे रहा होगा॥

बेबसी मेँ वो शख्स कुछ कह नहीँ पाया



बेबसी में वो शख्स, कुछ कह नहीं पाया।
खुश होकर भी वो, खुश रह नहीं पाया॥

शब-ए-गम की, वो सहर चाहता है



शब-ए-गम की वो, सहर चाहता है।
तुझे देखना इक, नज़र चाहता है॥

इक फसाने को, हकीकत समझ बैठे



इक फसाने को, हकीकत समझ बैठे।
अदा-ए-बेवफा को, आदमियत समझ बैठे॥

रोने न दीजियेगा, हसाया न जायेगा



रोने न दीजियेगा, हँसाया न जायेगा।
ये जख़्म सीने में, छुपाया न जायेगा।।

गुरुवार, 1 सितंबर 2016

न जाने उस रात, उसका हाल क्या होगा



न जाने उस वक़्त, उसका हाल क्या होगा।
जब उसके साथ, हुआ ये वाकया होगा।।

गम क्या जब वो, किस्मत से दूर था



गम क्या जब वो, किस्मत से दूर था।
वो मेरा है, ये मेरे दिल का फितूर था।।

दिल छोड़ा, दिल का लगाना छोड़ा



दिल तो छोड़ा, दिल का लगाना छोड़ा।
दिलवर, तेरी खातिर, ये जमाना छोड़ा।।

हासिल कश्ती को यूँ ही, किनारे नही होते



हासिल कश्ती को यूँ ही, किनारे नही होते।
कुछ तो हमारे होकर भी, हमारे नहीं होते।।

जिंदगी में बेबसी का, बेखुदी का आलम मिला



जिंदगी में बेबसी का, बेखुदी का आलम मिला।
रंज़-ओ-गम आड़ में, बेकली का मौसम मिला।।

जिन्दगी में कुछ, इस कदर से पेश आना पड़ा

जिन्दगी में कुछ, इस कदर से पेश आना पड़ा।
चाँद-तारों को भी, ज़ख्में दिल दिखाना पड़ा।।

वो ख्वाब, ख्वाब रह गया, वो चाह, चाह रह गई

वो ख्वाब, ख्वाब रह गया, वो चाह, चाह रह गई।
वो दर्द, दर्द रह गया, वो आह, आह रह गई।।

उसने कहा हमने मुस्कुराना छोड दिया

उसने कहा हमने मुस्कुराना छोड दिया।
उसकी हशरत मेँ, अरमानोँ को सजाना छोड दिया॥

मुझे तेरी मुहब्बत का, सहारा मिल गया होता

मुझे तेरी मुहब्बत का, सहारा मिल गया होता।
न कश्ती डूबती मेरी, किनारा मिल गया होता।।