शनिवार, 10 सितंबर 2016

अपनी हर ग़ज़ल में सिर्फ़, हिन्दुस्थान लिख दूँगा



खून-ए-दिल से ज़मी पे, इक ऐलान लिख दूँगा।
जर्रे-जर्रे में, सदा-ए-जवान लिख दूँगा।।

तकसीम करने वाले, मेरे मकसद को सुनते जाना,
फिर से मुल्क के हिस्से में, सारा ज़हान लिख दूँगा।।

हमको रोक सके, ये जमाने में दम नहीं,
नजर आए तेरे माथे पे, बेईमान लिख दूँगा।।

फिर तुमको माफ कर दूँगा, अब ये गुमान मत करना,
तेरी ज़मीं पे भी अपना, आसमान लिख दूँगा।।

रोके से नहीं रुकता, मैं वो तूफ़ान हूँ "प्रदीप",
अपनी हर ग़ज़ल में सिर्फ़, हिन्दुस्थान लिख दूँगा।।


रचनाकार -प्रदीप कुमार पाण्डेय