गुरुवार, 1 सितंबर 2016

न जाने उस रात, उसका हाल क्या होगा



न जाने उस वक़्त, उसका हाल क्या होगा।
जब उसके साथ, हुआ ये वाकया होगा।।


पलकों पे ठहर गए होंगे, आसूँ आकर,
लवों पे खामोंशियों का, साया होगा।।


उठी होंगी यादों की लहरें दिल में उसके,
दर्द भी उसके, सीने में समाया होगा।।


बहुत रोया होगा खुद को, तन्हा पाकर,
बेबसी में महफिल में मुस्कुराया होगा।।


जी रहा होगा बेतमन्ना बाकी जिंदगी को,
अपनों को ही अपनों से, दूर पाया होगा।।


एहसास हुआ होगा , "प्रदीप" की कमी का,
देखकर फलक को, बहुत पछताया होगा।।


रचनाकार: प्रदीप कुमार पाण्डेय