मंगलवार, 13 सितंबर 2016

आज ज़िन्दगी का, इक राज़ कह दिया उससे


आज ज़िन्दगी का, इक राज़ कह दिया उससे।
न चाहकर भी बहुत कुछ, आज कह दिया उससे।।

कोई  साज़िश हमारा, क्या बिगड़ेगी भला,
खामोश लफ़्ज़ों में, होके बेआवाज़ कह दिया उससे।।

समंदर सी उठा करती हैं, लहरें दिल में यादों की,
कोई फिर भी नहीं ऐतराज़, कह दिया उससे।।

आज़ार-ए-इश्क़ भी कितना, अज़ीब है "प्रदीप",
न इसका है इलाज़, कह दिया उससे।।

रचनाकार: प्रदीप कुमार पांडेय "प्रदीप"