शुक्रवार, 16 सितंबर 2016

कैसे तुम बिन जिए ये दीवाना तेरा


ऐ मेरी जान-ए-मन, तुमको मेरी कसम,
बाद में दूर जा, पहले ये तो बता,
कैसे तुम बिन जिए, ये दीवाना तेरा।

इश्क इक दर्द है, ये सुना था कभी,
खुद नहीं आजमाया था, अज़मा लिया,
दिल की हशरत जुदा, दिल से हो जाती है,
दिल्लगी से तेरी ये, सिला पा लिया।

तुमसे उम्मीद जो, रह गई है सुनो,
कर के मुझपे रहम, दे हटा ये वहम,
कैसे तुम बिन जिए, ये दीवाना तेरा।।

प्यार में यूँ तेरे, खो गया दिल मेरा,
तुमको ढूढूँ, कहाँ, मुझको दे दे पता,
कितनी दे दी ख़ुशी, कितना गम दे दिया,
ये मेरी जान-ए-मन, मुझको इतना बता।

दिल पे मेरे सनम, क्यों किये हैं ज़ख़्म।
बस यही पूछना था, बता जान-ए-मन,
कैसे तुम बिन जिए ये, दीवाना तेरा।।

रचयिता: प्रदीप कुमार पाण्डेय "प्रदीप"