शनिवार, 3 सितंबर 2016

कितनों का है सिंदूर मिटा, कितनों की मिटी कलाई है

स्वतंत्रता दिवस २०१६ पर विशेष।

कितनों का है सिंदूर मिटा, कितनों की मिटी कलाई है।
कितनों की गोदें सूनी हैं, कितनों ने जान गवाई है।।

कितनों ने साहस दिखलाया, कितनों ने लड़ी लड़ाई है।
कितनों के अथक प्रयासों से, ये स्वतंत्रता मिल पाई है।।


अब आज हमें ये करना है, दायित्व निभाएँ अपना हम।
भारत माता के चरणों में, सर्वस्व लुटाएँ अपना हम।।

भय भी भयभीत रहे हमसे, कुछ ऐसा कर दिखलाएँ हम।
ये भारत अपना भारत है, भारत को स्वर्ग बनाएँ हम।।


बस चार पंक्तियाँ लिखता हूँ, ये लिखना बहुत जरूरी है।,
उज्ज्वल भविष्य की खातिर इसका, हटना बहुत जरुरी है।।

भ्रष्टाचार का भारत से अब, मिटना बहुत जरूरी है।
योगदान सबको "प्रदीप", अब करना बहुत जरूरी है।।।