बुधवार, 31 अगस्त 2016

हर इस सवाल का, जवाब नहीं होता



हर इक सवाल का, जवाब नहीं होता।
गम-ए-उल्फत का, हिसाब नहीं होता।।


यूँ तो मिलते हैं, हजारों लोग जमानें में,
हर कोई दिल का, इन्तख़ाब नहीं होता।।


तन्हाई में देखा है आशिकों को रोते हमने,
भीगा तकिया, खुशी का असबाब नहीं होता।।


हुस्न वालों में, खुश्बू-ए-वफा नहीं होती,
कहते हैं हर सितारा, आफ़ताब नहीं होता।।


कहाँ तक रखे सब्र की, इन्तहाँ कोई,
हर किसी में ये, आदाब नहीं होता।।

जितना बेचैन है, तुझे मिलने को "प्रदीप",
हर किसी से मिलने को बेताब नहीं होता।।


रचनाकार: प्रदीप कुमार पाण्डेय