गुरुवार, 1 सितंबर 2016

जिंदगी में बेबसी का, बेखुदी का आलम मिला



जिंदगी में बेबसी का, बेखुदी का आलम मिला।
रंज़-ओ-गम आड़ में, बेकली का मौसम मिला।।


गुज़री है इस कदर से ये, यारों हमारी जिंदगी,
ख़ुशियाँ हयात को न ज़ख्मों को मरहम मिला।।


चंद लम्हों में, क्या बताएँ क्या मिला मुझको।
शहादत-ए-अरमाँ-ओ-आशिकी का मातम मिला।।


जो था नसीब में उसको कभी चाहा ही नहीं।
चाहा जिसे मैंने वो रुख्सत हर कदम मिला।।


या रब चाहा है खुद-ओ-खुदा से ज्यादा जिसको।
वो मिला मुझे न उसका रहम-ओ-करम मिला।।


रचनाकार: प्रदीप कुमार पाण्डेय