गुरुवार, 1 सितंबर 2016

मुझे तेरी मुहब्बत का, सहारा मिल गया होता

मुझे तेरी मुहब्बत का, सहारा मिल गया होता।
न कश्ती डूबती मेरी, किनारा मिल गया होता।।

चमन आबाद हो जाता, मेरे दिल का मेरी जाना,
तुम्हारे प्यार का मौसम, गवारा मिल गया होता।।

नहीं बेनूर होती फिर, मेरे दिलवर मेरी दुनियाँ,
तुम्हारे हुस्न का मुझको, सितारा मिल गया होता।।

नहीं होती कभी वीरान, मेरे इश्क की महफ़िल,
तेरी सूरत का गर मुझको, नज़ारा मिल गया होता।।

रचनाकार: प्रदीप कुमार पाण्डेय