शुक्रवार, 2 सितंबर 2016

रोने न दीजियेगा, हसाया न जायेगा



रोने न दीजियेगा, हँसाया न जायेगा।
ये जख़्म सीने में, छुपाया न जायेगा।।


जुदा न कर मुझको, उससे ज़माने वालों,
वो दिल में समाया है, भुलाया न जायेगा।।


लाख चाहूँ, न बचा पाउँगा, दामन अपना,
अश्कों को पलकों पे, उठाया न जायेगा।।


ज़दा है दिल उसके, जख़्म-ए-सितम से यूँ,
कोई पूछे हाल-ए-दिल, बताया न जायेगा।।


मुझे मालूम है, वो जा रहा है रुख्सत होकर,
एक पल मेरे बिन उससे, बिताया न जायेगा।।


नाम-ए-"प्रदीप" का चर्चा, मैं शरेआम तो कर दूँ
अल्फ़ाज-ए-ग़ज़ल लबों पे, सजाया न जायेगा।।


रचनाकार; प्रदीप कुमार पाण्डेय