शुक्रवार, 2 सितंबर 2016

तसल्ली दिल को जिसको, देखने के बाद आती है



तसल्ली दिल को जिसको, देखने के बाद आती है।
वो जालिम जब भी आती है, करने नाशाद आती है॥


हज़ारों ख्वाब बनते और, बनकर टूट जाते हैं,
नींद जब भी हमें आती, करने बेदाद आती है॥


हुए हैं दफ्न अरमाँ जब, दिल-ए-आशिक के दिल में ही,
शब-ए-गम में लबों पे फिर, कोई फरियाद आती है॥


याद-ए-दिलवर अब कुछ, इस कदर आती है "प्रदीप",
मैं खुद को भूल जाता हूँ, वही बस याद आती है॥


रचनाकार: प्रदीप कुमार पाण्डेय