गुरुवार, 1 सितंबर 2016

वो ख्वाब, ख्वाब रह गया, वो चाह, चाह रह गई

वो ख्वाब, ख्वाब रह गया, वो चाह, चाह रह गई।
वो दर्द, दर्द रह गया, वो आह, आह रह गई।।

वो प्यार, प्यार रह गया, वो इश्क, इश्क रह गया,
वो नूर, नूर रह गया, वो राह, राह रह गई।।

वो ज़ाम, ज़ाम रह गया, वो नाम, नाम रह गया,
वो श्याम, श्याम रह गया, वो स्याह, स्याह रह गई।।

वो वक्त, वक्त रह गया, वो मस्त, मस्त रह गया,
वो प्रदीप, "प्रदीप" रह गया, वो वाह, वाह रह गई।।

रचनाकार: प्रदीप कुमार पाण्डेय