रविवार, 4 सितंबर 2016

वो मेरी बर्बादी की कहानी लिख रहे है


वो मेरी बर्बादी की कहानी लिख रहे है
अपनी जिन्दगी मैनें जिनके नाम कर दी।


वो मेरी शब-ए-गम की सहर न कर सके,
जिनके लिए मैंने अपनी खुशियों की शाम कर दी।।


मुझे मालूम था, उनकी दुआओं से असर नहीं होगा,
फिक्र मेरी क्या करेंगे वो, जिन्हे खुद की खबर नहीं।


खामोश है मंजिल सुनसान राहें हैं,
जिन्दगी जंग भी है, महज ज़फर नहीं।।


अजीब मुकाम है, सफ़र भी तन्हा है,
जिन्दगी क्यों तेरा कोई रहबर नहीं।


गमगीन हूँ, गमज़दा हूँ, फिर भी उम्मीद बाकी है,
ये दिल है कि इसे भी तेरे बिना सबर नहीं।।


रचनाकार: प्रदीप कुमार पाण्डेय