मंगलवार, 31 जनवरी 2017

हमारे दिल की मायूसी



हमारे दिल की मायूसी, कभी आकर के देखो तुम।
लबों पे नाम चाहत का, कभी लाकर के देखो तुम।
खुद भी रो पड़ोगे, और दुनिया को रूला दोगे,
हमारे गीत महफ़िल में, कभी गाकर के देखो तुम।।

सोमवार, 30 जनवरी 2017

शेर



बजाहिर मेरे पास लफ्ज़ों के सिवा कुछ भी नहीं।
कुछ पुरानी यादों, कुछ रिस्तों के सिवा कुछ भी नहीं।।
लोग कहते हैं, मैं तन्हाँ क्यों, मैं, अकेला क्यों हूँ,
मेरे मुकद्दर, मेरी तकदीर में, अश्कों के सिवा कुछ भी नहीं।।

रविवार, 29 जनवरी 2017

हमारे गीत भी दुनिया, हमारे बाद गायेगी




अभी तक जो अधूरी है, कहानी मैं सुनाता हूँ।
लिखे जो गीत हैं अब तक, उन्हें अब गुनगुनाता हूँ।
ज़रा तुम गौर से सुनना, हमारे दिल की फरियादे,
अभी तक जो दबी थीं अब, उन्हें होठों पे लाता हूँ।।

शनिवार, 28 जनवरी 2017

तेरे हिज्र में अपना दामन भिगोता रहा



तेरे में अपना भिगोता रहा।
मैं की में रोता रहा।।

शुक्रवार, 27 जनवरी 2017

सदा-ए-दिल को भी मेरी, तराना क्यों समझता है



सदा-ए-दिल को भी मेरी, तराना क्यों समझता है।
नहीं मालुम मुझे शायर, ज़माना क्यों समझता है।।


गुरुवार, 26 जनवरी 2017

ये धरा हमारी है, ये देश हमारा है


ये धरा हमारी है, ये देश हमारा है।

ये अम्बर अपना है, परिवेश हमारा है।

जो तीन रंग वाला, परचम लहराता है

वो मिलकर रहने का, सन्देश हमारा है।।

मंगलवार, 24 जनवरी 2017

जख्म तो भर गया मगर आयत बनी रही


रब की तो मेहरबानि-ओ-इनायत बनी रही।
हमसे जमाने को मगर शिकायत बनी रही।।

मंगलवार, 10 जनवरी 2017

तू शान-ए-मुहब्बत है


मैं प्यार का परचम हूँ, तू शान-ए-मुहब्बत है।
औरों से जुदा अपनी पहचान-ए-मुहब्बत है।।

सोमवार, 9 जनवरी 2017

जीवन ज्योति जगाने वाली जननी का



जिसके आंचल में खेला उस अवनी का।
सूरज, चाँद,सितारे, दिन का रजनी का।
जीवन देकर के भी ऋण न चुका पाऊं,
जीवन ज्योति जगाने वाली जननी का।।