बुधवार, 1 फ़रवरी 2017

चाहत के परदे पे, मेरी उम्मीदों के सितारे हैं



चाहत के परदे पे, मेरी उम्मीदों के सितारे हैं।
कुछ ख्वाब हैं दिल में, कुछ पलकों पे नजारे हैं।।


कुछ जुनूँ इश्क का, कुछ खुमार चाहत का तेरी,
कुछ नशा प्यार का, कुछ मुहब्बत के शरारे हैं।।


निकल पड़े हैं हम जिस राह पर ढूँढ़ने तुझको,
मुझे मालूम है उस राह पर, दहकते अंगारे हैं।।


राह-ए-उल्फत में कोई, न रहज़न है न रहबर है,
ज़िन्दगी हम तिरा साथ पाकर भी बेसहारे हैं।।


जर्जर कस्ती है, और मुसाफ़िर भी अकेला हूँ मैं,
ये दौर तूफ़ानों का है, फिर अभी दूर किनारे हैं।।


समन्दर सी अपनी आँखों में डूब जाने दे मुझे,
“प्रदीप” अपनी दुनिया, तिरी मुहब्बत में हारे हैं।।