बुधवार, 8 फ़रवरी 2017

किसी की चाहत में फ़ना हो जाना इश्क है




किसी की चाहत में फ़ना हो जाना इश्क है।
किसी की यादों में ज़िन्दगी बिताना इश्क है।।


खुद से बेखबर होकर भी, उसकी रहे खबर,
ख्वाबों में भी उसे जुदा न कर पाना इश्क है।।


यूँ तो जहाँ में मिलती हैं नज़रों से नजरें हज़ारों,
नज़र ही नज़र में दिल का लगाना इश्क है।।


खुद के लिये जीना तो ज़िन्दगी का नाम है,
किसी अज़नबी से रिश्तों का निभाना इश्क है।।


फक्त खुशी की तलाश, खुदगर्जों को होती है,
गम के गीत भी, महफ़िल में गाना इश्क है।।


जुदा हैं दिल-ब-दिल अंदाज-ए-इश्क दुनिया में,
किसी की याद में “प्रदीप” अल्फ़ाज सजाना इश्क है।।