बुधवार, 8 नवंबर 2017

वफ़ादार को ही सताया गया।

वफ़ादार  को   ही   सताया   गया।
यहाँ  कातिलों  को  बचाया गया।।

सियासी   जमाना    बदस्तूर    है,
हमेशा  वही  रंज़   खाया   गया।।

बज़ाहिर  मुसाफिर  अकेला सही,
मिरा  हाल  कैसा  सुनाया  गया।।

ग़रीबी    हमेशा    रही  है    जवाँ
बुढ़ापा  अमीरी  पे'  लाया गया।।

उसे  भी  वही  तो  रहा   है  गुमाँ,
कि  जैसा उसे  जो बताया गया।।

कसूरों,    फ़रेबों,    गुनाहों  तुम्हें,
कहाँ से कहाँ तक छुपाया गया।।

नहीं  और जीने का' हक चाहिए,
नशेमन  हमारा  जलाया   गया।।

-प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप'