शनिवार, 29 सितंबर 2018

बहर-ए-रमल मुसम्मन मख़बून महज़ूफ़ पर आधारित फिल्मी /क्लासिकल गीत

बहर-ए-रमल मुसम्मन मख़बून महज़ूफ़ एक बहुत ही प्रसिद्ध बहर है। इसका वज़्न 2122 1122 1122 22 है और इसे रमल के अर्'कान पर जिहाफ़ लगाकर प्राप्त किया गया है। जिहाफ़ों की चर्चा हम पुनः किसी दिन करेंगे। अभी हम चर्चा करते हैं, इस बहर पर कुछ फिल्मी गीतों की। हिंदी फिल्मों में इस बहर पर कई गीत लोकप्रिय हुए। इनमें से कुछ गीतों की चर्चा हम यहाँ करेंगे। प्रत्येक रुक़्न के बाद तिरछी रेखा का चिह्न बना दिया गया है, ताकि पाठक सरलता से समझ सकें।

 वज़्न: 2122 1122 1122 22

1. आज की रा/त ज़रा प्या/र से बातें / कर ले,
    कल तेरा शह/र मुझे छो/ड़ के जाना होगा।।

2. दिल की तन्हा/ई को आवा/ज़ बना ले/ते हैं,
    दर्द जब हद / से गुज़रता / है तो गा लेते हैं।।

3. दिल का भोला / है तबीयत / का बड़ा है सादा,
    वादी-ए-इश्/क से आया / है मेरा शह/ज़ादा।।

4. वो मेरी नीं/द मेरा चै/न मुझे लौ/टा दो।।

5. हम तेरे शह/र में आए / हैं मुशाफ़िर / की तरह,
    सिर्फ़ इक रा/त ठहर जा/ने का मौका / दे  दे।।

6. हुस्न हाज़िर/ है मुहब्बत/ की सज़ा पा/ने को।
    कोई पत्थर/  से न मारे /  मेरे दीवा/ ने   को।।
   

क्रमशः