शुक्रवार, 5 अक्तूबर 2018

ग़ज़ल गीत गाता रहूँगा.....

नये सुर सजाता  रहूंगा।
ग़ज़ल गीत गाता रहूंगा।।

मुझे रात भर तुम जगाना,
तुम्हें मैं जगाता रहूंगा।।

भरी बज़्म में मैं हमेशा,
सभी को हंसाता रहूंगा।।

कभी रूठ कर तुम गये तो,
तुम्हीं को मनाता रहूंगा।।

मकाँ रेत का ही मिरा मैं,
बनाकर मिटाता रहूंगा।

मुझे नाज़ है हमनसीं पे,
जहाँ को बताता रहूंगा।।

लगी आग है तनबदन में,
इसी को बुझाता रहूंगा।।

मिला 'दीप' जो प्यार दिल का,
दिलों पे लुटाता रहूंगा।।

-प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप'