रविवार, 7 अक्तूबर 2018

ज़रा प्यार से मुस्कुरा कर तो देखो

*[बहर-ए-मुत्कारिब मुसम्मन सालिम]*
*[ 122  122  122  122 ]*

ज़रा  प्यार  से  मुस्कुरा  कर  तो  देखो।।
करीब और थोड़ा सा आ कर तो  देखो।।

तेरा बन के  रह  जाऊँगा  उम्र भर  तक,
कभी मुझको अपना बना कर तो देखो।।

रवायत      रवायत      रहेगी     हमेशा,
हथेली  पे  सरसों  उगा कर  तो  देखो।।

कई  चाँद  पड़   जाएँगे   आज   फ़ीके,
ज़रा रुख़ से पर्दा उठा  कर  तो  देखो।।

चले   आएँगे   एक   आवाज़   में   ही,
कभी आप हमको बुला कर तो देखो।।

हमेशा    तुम्हें     याद     आते     रहेंगे,
हमें  भूल  से  भी  भुला कर तो देखो।।

वो  महफ़िल  में  आँसू   बहाने   लगेंगे,
ग़ज़ल 'दीप' की गुनगुना कर तो देखो।।


-प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप'