शनिवार, 6 अक्तूबर 2018

अमन की चैन की खातिर....

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*ईद*

बह्र-ए-हज़ज़ मफ़रद मुसम्मन सालिम

मुफ़ाईलुन x ४

१२२२  १२२२  १२२२ १२२२

उठें गर हाथ सज़दे में तो'बस दिल से दुआ आये।
अमन की चैन की खातिर जमाने की सदा आये।।

नबी से ओ खुदा से है यही बस इल्तिजा मेरी,
खुशी किस्मत में' हो सबके न हिस्से में जफ़ा आये।।

जमाने से नहीं कोई गिला मेरा मगर फिर भी,
मेरी हसरत जमाने को जमाने की अदा आये।।

मुझे मकबूलियत अपनी नहीं प्यारी कभी भी थी,
गरीबों को मिले रोटी अमीरों को मज़ा आये।।

मुबारक ईद हो सबको यही दिल से दुआ मेरी,
तराने 'दीप' के सुनकर लगा शायद खुदा आये।।

-प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप'

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