शुक्रवार, 5 अक्तूबर 2018

देश का सुधार हो - रक्ता छंद



🍁रक्ता छंद🍁
रगण जगण गुरु
212  121  2

देश का सुधार हो।
धर्म का प्रसार हो।।
भावना पुनीत हो।
शिष्ट हो विनीत हो।।

नित्य प्रेम योग हो।
देह भी निरोग हो।।
बात का प्रभाव हो।
सौम्य सा स्वभाव हो।।

विश्व में तरंग हों।
लोग संग संग हों।।
गेह नित्य होम हो।
शुद्ध रोम-रोम हो।।

साम्यता घनी रहे।
सौम्यता बनी रहे।।
नित्य नौविहान हो।
नेह का वितान हो।।

-प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप'