सोमवार, 1 अक्तूबर 2018

देश से द्रोहियों को वफ़ा कीजिए

बहर: २१२ २१२ २१२ २१२

देश से द्रोहियों को दफ़ा कीजिए।
ये वतन है वतन से वफ़ा कीजिए।।

तोड़ देना अगर हाथ उठने लगें,
बेवज़ह मत किसी को ख़फ़ा कीजिए।।

हम न हारे तवारीख करती बयां,
फ़र्ज़ अपना अदा बावफ़ा कीजिए।।

मुश्किलों का करो उम्र भर सामना,
देशहित में जियो मत जफ़ा कीजिए।।

चैन की नींद सोयें यहां पर सभी,
ज़िन्दगी का यही फ़लसफ़ा कीजिए।।

'दीप' हासिल अगर हो शहादत तुम्हें,
एक-दो बार क्या हर दफ़ा कीजिए।।

-प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप'