सोमवार, 1 अक्तूबर 2018

ग़म की ख़ुशी की यारा आसार ज़िन्दगी है...

बहर: २२१ २१२२ २२१ २१२२

गम की खुशी की' यारा, आसार ज़िन्दगी है।
तुम हो तो' ठीक बरना, बेकार ज़िन्दगी है।।

मत फेर मुझसे' नज़रें, मत कर गुरूर इतना,
तेरे ही' संग मेरी, साकार ज़िन्दगी है।।

कुछ कर गुज़रने' की है चाहत हमारे' दिल में,
खातिर वतन की' हमको दरकार ज़िन्दगी है।।

श्रीराम कृष्ण​ परशू, नरसिंह, मत्स्य वाराह,
बुध कूर्म कल्कि वामन अवतार ज़िन्दगी है।।

ढाये सितम हज़ारों बेशक कसूर क्या था,
अब होती' जा रही ये, सरकार ज़िन्दगी है।।

पढ़ लीजिए सभी अब इस 'दीप' की कहानी,
ऐसा लगेगा' मानों अख़बार ज़िन्दगी है।।

-प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप'