शुक्रवार, 5 अक्तूबर 2018

झलक भारत के इतिहास की

*झलक भारत के इतिहास की*

भारत को आर्यावर्त कहा जाता है। आर्य (श्रेष्ठ) लोगों का यहाँ निवास रहा है। ऋग्वेद में इसे "सप्तसिंधु" प्रदेश  कहा गया। ऋग्वेद के नदीसूक्त में (१०/१५) में आर्यावर्त में प्रवाहित नदियों का एकत्र वर्णन है, जिसमें काबुल, कुर्रम, गोमती, सिंधु, रावी,  सतलज, झेलम, सरस्वती, यमुना और गंगा आदि प्रमुख नदियाँ हैं।

सनातन धर्म सबसे प्राचीन धर्म है।  हमें पढ़ाया जाता है कि वर्ष १४९८ ई० में वास्को डी गामा ने भारत की खोज की। मैंने भी पढ़ा है परंतु आज तक यह नहीं समझ में आ सका कि हमारा आर्यावर्त कहीं खो गया गया था क्या? जिसे १४९८ ई० में वास्को डी गामा द्वारा पुनः खोजा या फिर भारत की रचना ही वास्को डी गामा ने की। उत्तर जो भी हो, परंतु सत्य यही है कि आजकल जो इतिहास हमें पढ़ाया जा रहा है, वह हमें दिग्भ्रमित करने के लिए है। वास्तविकता छुपाई जा रही है और इतिहास को अपने अनुसार प्रस्तुत किया जा रहा है या वास्तविक ज्ञान के अभाव में मनगढ़ंत बातों का समावेश किया जा रहा है। मेरा प्रश्न है कि भारतीय इतिहास को समझने के लिए कौन सी पुस्तकें पढ़ना आवश्यक है? गीता, श्रीरामचरितमानस, रामायण, महाभारत या फिर विदेशी लेखकों की पुस्तकें जिन्हें सनातन धर्म के बारे में "स" भी नहीं पता। हमारे यहाँ आज भी *"सनातन धर्म की - जय"* बोली जाती है।
विश्व में सबसे पहले आकाश में उड़ने वाला विमान मुनि भरद्वाज ने बनाया था जिसका नाम "पुष्पक" था। (विकपिडिया में इसे अंगिरा ऋषि द्वारा बनाया हुआ बताते हैं, कुछ अन्य स्थानों पर जैसे वाल्मीकि रामायण में इसे विश्वकर्मा द्वारा बनाया हुआ बताते हैं) परंतु वास्तविकता ज्ञात करने के लिए हमें महर्षि भरद्वाज कृत ग्रंथ *"वैमानिक शास्त्र"* को पढ़ना चाहिए। यह ग्रंथ महर्षि भरद्वाज के प्रमुख ग्रंथ *"यंत्र सर्वेश्वम्"* का एक भाग है।  *"वैमानिक शास्त्र"* में ८ अध्याय १०० अधिकरण, ५०० सूत्र और ३००० श्लोक हैं। यह ग्रंथ वैदिक संस्कृत भाषा में है।

चिकित्सा पद्धति के लिए आयुर्वेद का मूल ग्रंथ *"चरक संहिता"* है। यह प्रसिद्ध ग्रंथ भी संस्कृत भाषा में है। *"चरक संहिता"* में ८ भाग और १२० अध्याय हैं। इसके रचयिता आचार्य चरक थे।  आचार्य चरक की शिक्षा *"तक्षशिला"* में हुई थी। *"तक्षशिला"* आर्यावर्त के गांधार देश की राजधानी और शिक्षा का प्रमुख केद्र था। यहाँ का विश्वविद्यालय विश्व के प्राचीनतम विश्वविद्यालयों में सम्मिलित है। आचार्य चाणक्य यहाँ के आचार्य थे।  आजकल यह स्थान पाकिस्तान के रावलपिंडी में है। *"तक्षशिला"* का उल्लेख रघुवंश, रामायण, वायु पुराण, महाभारत आदि ग्रथों में किया गया है।

विश्व के प्रथम शल्यचिकित्सक महान चिकित्साशास्त्री *"आचार्य सुश्रुत"* भारत के थे। इनका जन्म पूर्वी उत्तर प्रदेश में *"काशी"* में हुआ था। इन्होंने *"सुश्रुत संहिता"* की रचना की है। *"आचार्य सुश्रुत"* ने वैद्यराज धन्वंतरि से शिक्षा प्राप्त की थी। शल्य चिकित्सा में आचार्य सुश्रुत १२५ प्रकार के उपकरणों का प्रयोग करते थे।  आचार्य सुश्रुत ने ३०० प्रकार की शल्य प्रक्रियाओं की खोज की थी। आचार्य सुश्रुत नेत्र शल्य चिकित्सा भी करते थे। शल्य चिकित्सा द्वारा प्रसव कराने का ज्ञान भी सुश्रुत के पास था।

भारतीय अंक गणना (गणित) में जो स्थान आर्यभट्ट और भास्कराचार्य जी का है, वह अविस्मरणीय है। शून्य की खोज आर्यभट्ट ने की। वर्ष ४९८ ई० में आर्यभट्ट ने अपने ग्रंथ *"आर्यभट्टीय"* (संख्यास्थाननिरूपणम्) में लिखा है..

*"एकं च दशं च शतं च सहस्त्रं तु अयुतनियुते तथा प्रयुतम्।*
*कोट्यर्बुदं च वृन्दं स्थानात्स्थानं दशगुणं स्यात्।।"*
अर्थात् एक, दश, शत, सहस्त्र, अयुत (दश हजार), नियुत (लाख), प्रयुत (दश लाख) , कोटि (करोड़), अर्बुद (दश करोड़)  तथा बृंद (अरब) में प्रत्येक पिछले स्थान वाले से अगले स्थान वाला दस गुना है।

उपर्युक्त समस्त ऐतिहासिक उपलब्धियों को वर्तमान की पुस्तकों से पृथक किया जाने लगा है। मेरी अभिलाषा है कि यदि भविष्य में साहित्य संगम संस्थान ने अपना पुस्तकालय स्थापित किया तो इन सभी पुस्तकों की उपलब्धि मैं करवाऊँगा। भारतीय इतिहास हमारी अमूल्य धरोहर है। इसे बचाकर रखना हमारा नैतिक कर्तव्य है।

-प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप'