शनिवार, 6 अक्तूबर 2018

मेरा इश्क़ भी बेमिसाल है...

मेरी एक ग़ज़ल

११२१२  ११२१२  ११२१२  ११२१२

है' मिरा फ़साना' मिरी है' बज़्म वो' सिर्फ़ यूं ही' तो' गा रहे।
वो' जिन्हें था' आना' वो' आ गये, वो' जिन्हें था' जाना' वो' जा रहे।।

है' अज़ीब बात बड़ी बहुत, के' मिटा दिये हैं' गये निशाँ,
के' जिन्हें नहीं है' खबर भी' खुद की' मुझे तो' वो भी' सिखा रहे।।

है' ये' इल्तिजा भी' मिरी खुदा, तू' रहम करे, तू' करम करे,
मिरे' दोस्तों की' खुशी रहे, ओ' सलामती की' दुआ रहे।।

मुझे' लौट कर वो' मिला नहीं, जो' यहां गया था' मैं' छोड़कर,
मिरी' बदनसीबी' बनी रही, मुझे' लोग अब भी' सता रहे।।

मिरा' इश्क़ भी बे' मिसाल है, बे' नकाब है, है' बे' इंतहा,
यही' दीप की हैं' गुज़ारिशें, जो' बना है' यूं ही' बना रहे।।

-प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप'