शुक्रवार, 5 अक्तूबर 2018

मुक्तक भाग -२

१.
किसी अपने की चाहत ने, बेगाना मुझको कर डाला।
फ़साने का नया उसने निशाना मुझको कर डाला।
असर तहरीर का मेरी हुआ उस पर नहीं लेकिन,
अदा-ए-हुस्न से उसने दिवाना मुझको कर डाला।।

२.
मिटाकर द़ाग आये हैं, अभी एहसास बाकी है।
हुआ वो बेवफ़ा तो क्या अभी इख़्लास बाकी है।
खुदा की नेमतों का आज सौदा कर लिया उसने,
मगर इतना बता दूँ मैं अभी इक आस बाकी है।।

3.
दुआ मेरी है' ये रब से, मिले शोह्रत जमाने में।
मुकाबिल आपके कोई न हो सूरत जमाने में।
खुदा तुमको अता कर दे, जहाँ की नेमतें सारी,
मुहाफ़िज़ आपकी हो 'दीप' ये कुदरत जमाने में।।

- प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप'