मंगलवार, 2 अक्तूबर 2018

नशा प्यार का इस कदर हो गया है..

नशा प्यार का इस  कदर  हो  गया  है।
ज़माने से दिल  बे-ख़बर हो  गया  है।।

कभी  अज़नबी  जो  हमारे   लिए  था,
वही  आजकल  मोतबर  हो  गया है।।

नया   शहर  है   और   रिश्ते   नए   हैं,
यही सोचकर मुझको डर  हो गया है।।

न जाने हुआ क्या इन आँखों  को  मेरी,
मुझे  जागते  रात  भर  हो   गया   है।।

मुहब्बत   के   वादे    निभाते   निभाते
ये कुर्बान जान-ओ-जिगर हो गया है।।

जो दिल अपना हारा था उल्फत में तेरी,
तुझे  पाने  के  बाद  सर  हो  गया  है।।

मिला साथ तेरा जो मुझको तो फिर से
हरा  ज़िन्दगी  का  शज़र  हो  गया है।।

पड़े नक्श तेरे जो  घर  में  तो  फिर  से,
मेरा घर हक़ीक़त में  घर  हो  गया  है।।

रहा  मुझपे  ऐसा  करम  उस ख़ुदा का,
ज़रूरत के माफ़िक़ बसर  हो गया है।।

चढ़ा  हुस्न  उसका जो परवान पर  तो,
मेरा  इश्क़ भी  पुर-असर हो  गया है।।

कदम से कदम 'दीप' जब से  मिलाए,
तो आसान कितना सफ़र हो गया है।।

-प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप'