शनिवार, 6 अक्तूबर 2018

वफ़ादार को ही बताया गया..

ग़ज़ल गुंजन साहित्य संगम संस्थान द्वारा दि० १७ जून २०१७ को आयोजित ग़ज़ल सृजन प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त करने पर संस्थान का कोटि-कोटि धन्यवाद!

बह्र-ए-मुत्कारिब मुसम्मन मक्सूर

फऊलुन x 3 + मुफा

122  122  122  12

वफ़ादार को ही सताया गया।
यहाँ कातिलों को बचाया गया।।

सियासी जमाना बदस्तूर है,
हमेशा वही रंज़ खाया गया।।

बज़ाहिर मुसाफिर अकेला सही,
मिरा हाल कैसा सुनाया गया।।

ग़रीबी हमेशा रही है जवाँ
बुढ़ापा अमीरी पे' लाया गया।।

उसे भी वही तो रहा है गुमाँ,
कि जैसा उसे जो बताया गया।।

कसूरों, फ़रेबों, गुनाहों तुम्हे,
कहाँ से कहाँ तक छुपाया गया।।

नहीं और जीने का' हक चाहिए,
नशेमन हमारा जलाया गया।।

प्रदीप कुमार पाण्डेय