शुक्रवार, 2 अगस्त 2019

ज़ख़्म दिल के क्या दिखाना



ज़ख़्म दिल के क्या दिखाना, छोड़ अब जाने भी दे।
वाकया  ये  है  पुराना,  छोड़  अब  जाने   भी   दे।।

कौन जाने कब कहाँ पर उनसे अब होगा मिलन,
हो गया बिछड़े ज़माना, छोड़ अब जाने भी दे।।

आपकी मिट्टी की काया, मिट्टी में मिल जाएगी,
एक दिन सबको है जाना, छोड़ अब जाने भी दे।

फ़िक्र है किसकी तुझे, तुझको किसका ख़ौफ़ है,
व्यर्थ का झूठा बहाना छोड़  अब  जाने  भी  दे।।

कब तलक करते रहोगे इस तरह गुमराह तुम,
हर जगह सिक्का जमाना छोड़ अब जाने भी दे।

कैसे साबित कर सकोगे आज खुद को बेगुनाह,
है बहुत ज़ालिम ज़माना, छोड़ अब जाने भी दे।।

'दीप'  ने  मंज़र  तबाही  के  कई  देखे  यहाँ,
इसलिए अब रहम खाना, छोड़ अब जाने भी दे।।

-प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप'

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