शुक्रवार, 9 अगस्त 2019

आज मुद्दत के बाद घर देखा

यार  को  आज भर  नज़र  देखा।
इश्क़ आँखों  में  पुरअसर देखा।।

उसकी नज़रों में इक  हुनर  देखा।
खुद से खुद को ही बेख़बर देखा।।

हमने क्या शाम क्या  सहर  देखा।
ख़्वाब में उनको रात  भर  देखा।।

उम्र भर  फिर  न  लौटकर  देखा।
उसने देखा तो किस कदर देखा।।

जिसने समझी न वक़्त की कीमत,
घूमता  उसको  दर-ब-दर  देखा।।

तुम  ही आये  नहीं  कभी  मिलने,
रास्ता   हमने   उम्र   भर   देखा।।

'दीप'  गुरबत  का  खा़मियाजा  है,
आज  मुद्दत  के  बाद  घर  देखा।।

-प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप'

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