सोमवार, 5 अगस्त 2019

आज उसी बेदर्दी का दिल और किसी पर आया है



जिसकी खातिर मैंने अपना चैन सुकून गँवाया है।
आज उसी बेदर्दी का दिल और किसी पर आया है।।

उसकी बेपरवाही से हम, इक दूजे से दूर हुए।
जीवन भर के सपने सारे, पल में चकनाचूर हुए।।
मेरा साथ छोड़ कर उसने, गैर का साथ निभाया है।
आज उसी बेदर्दी का दिल और किसी पर आया है।।

अक्सर मेरे दिल में चुभती रहती हैं उसकी बातें।
याद में उसकी रो-रो कर, कटती हैं अब तो रातें।।
मेरे दिल की उम्मीदों को, दिल में ही दफ़नाया है।
आज उसी बेदर्दी का दिल और किसी पर आया है।।

प्यार को मेरे प्यार न समझा, चाहत को ठुकरा डाला।
जाते-जाते थमा गया वो, अपनी यादों का प्याला।।
ग़म की आग को उसने मेरे सीने में सुलगाया है।
आज उसी बेदर्दी का दिल और किसी पर आया है।।

उसके बिन ये नदी, बगीचे मुझे न बिल्कुल भाते हैं।
एक बार तो आ जाए वह, मेरे गीत बुलाते हैं।
मेरे अश्कों पर भी उसने, थोड़ा रहम न खाया है।
आज उसी बेदर्दी का दिल और किसी पर आया है।।

-प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप'

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