शनिवार, 3 अगस्त 2019

मुस्कान-ए-मुहब्बत है

है प्यार भरा दिल में, मुस्कान-ए-मुहब्बत है।
दिल तुमसे लगा जाकर, एहसान-ए-मुहब्बत है।।

जो दिल में अभी तक है, बेनाम भले कह लो,
उम्मीद मे'रे दिल की, उनवान-ए-मुहब्बत है।।

बरसात के' मौसम में, आ जाना' कभी दिलवर,
ये मेरी' तमन्ना है, अरमान-ए-मुहब्बत है।।

हैं फ़लक ज़मीं दोनों, इक साथ ज़माने से,
दिलकश ये' नमूना है, गैहान-ए-मुहब्बत है।।

हो जाये' फ़रेबी गर, ये दुनिया' मिरे दिलवर,
हरदम ही' वफ़ा करना, फ़र्मान-ए-मुहब्बत है।।

ज़िंदा है' वफ़ा तुमसे, तुम नूर-ए-ज़माना हो,
ये तेरी' अदा दिलवर, ईमान-ए-मुहब्बत है।।

सींचा है' मुहब्बत को, अश्क़ों से अगर उसने,
वो शख़्स ज़माने में, इक बान-ए-मुहब्बत है।।

मुश्किल से' जिया अब तक, बेदर्द ज़माने में,
आखिर में समझ आया, दिल ज़ान-ए-मुहब्बत है।।

इक मज़नू' था' इक राँझा, बेताब दी'वाने थे,
अब दीप ज़माने में, दीवान-ए-मुहब्बत है।।


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